बिहार सरकार राज्य में सुनियोजित शहरीकरण की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रही है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिला मुख्यालय स्तर पर ‘जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार’ का गठन करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन प्राधिकारों के लिए 1350 नए पदों का सृजन भी स्वीकृत किया गया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक जिले में योजनाबद्ध शहरी विकास को धरातल पर उतारना है, जिससे शहरों और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित और समेकित विकास संभव हो सके।
हर शहर के लिए मास्टर प्लान और GIS आधारित मैपिंग
राज्य सरकार का फोकस शहरी इलाकों के सुनियोजित विकास पर है। इसके तहत हर जिले के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें आगामी 20 वर्षों की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए विभिन्न भूमि उपयोग- जैसे आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों की रूपरेखा बनाई जाएगी। इन योजनाओं में सड़क नेटवर्क, जल निकासी, बिजली, सार्वजनिक सुविधाओं आदि का भी समावेश होगा।
GIS आधारित मैपिंग के माध्यम से जमीन की जानकारी और विकास की दिशा को सटीक रूप से निर्धारित किया जा रहा है, ताकि भू-उपयोग की अधिकतम उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। विभाग द्वारा टाउनशिप परियोजनाओं और सैटेलाइट टाउन विकास योजनाओं पर भी काम शुरू कर दिया गया है। 38 जिला आयोजना प्राधिकारों के गठन की मंजूरीसरकार ने सभी 38 जिलों में जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार गठित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत नौ प्रमंडलीय जिला मुख्यालयों में प्रति प्राधिकार 39 पद, शेष 29 जिलों में प्रति प्राधिकार 34 पद, जबकि पटना महानगर क्षेत्र के लिए अलग से 13 पद (नौ सहायक नगर योजना पर्यवेक्षक और चार उप नगर योजना पर्यवेक्षक) सृजित किए गए हैं। कुल मिलाकर 1350 पदों का सृजन किया गया है। इन पदों के अंतर्गत मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता, नगर निवेशक, सांख्यिकी पदाधिकारी, आर्किटेक्ट, रियल एस्टेट विशेषज्ञ, अकाउंटेंट सहित प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। GIS एक्सपर्ट, IT मैनेजर और मल्टी टास्किंग स्टाफ की भी होगी बहालीआवश्यकतानुसार हर प्राधिकार में GIS विशेषज्ञ, IT मैनेजर, डाटा एंट्री ऑपरेटर और मल्टी टास्किंग स्टाफ की भी सेवाएं ली जाएंगी। इनकी बहाली विभाग द्वारा चयनित एजेंसी अथवा बेल्ट्रॉन के माध्यम से निर्धारित मानदेय पर की जाएगी। इससे योजना निर्माण से लेकर उसके निष्पादन तक तकनीकी दक्षता सुनिश्चित की जा सकेगी। जिला स्तर पर विकास योजनाओं को मिलेगा समेकित रूपदावा किया गया है कि जिला स्तर पर इन आयोजना प्राधिकारों के सक्रिय होने से नगर निकायों, पंचायतों और अन्य विभागों के विकास कार्यों का समन्वय बेहतर ढंग से हो सकेगा। विभाग की मंशा है कि सैटेलाइट टाउनशिप, एरिया डेवलपमेंट स्कीम जैसी योजनाएं अब और तेजी से लागू की जा सकेंगी। इन प्राधिकारों के माध्यम से न सिर्फ मास्टर प्लान की निगरानी होगी, बल्कि अन्य विभागों द्वारा कि जाने वाले भौतिक आधारभूत संरचना कार्यों में भी सामंजस्य स्थापित किया जाएगा।यह भी पढ़ें- Bihar:ddu जंक्शन से प्रधान खांटा तक 160km प्रति घंटे की गति से सफलतापूर्वक स्पीड ट्रायल, जानें मिशन रफ्तार शहरी विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहलनगर विकास एवं आवास मंत्री जिबेश कुमार ने इस पहल को शहरी विकास की दिशा में मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार शहरीकरण को व्यवस्थित, टिकाऊ और जनहितैषी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन प्राधिकारों की स्थापना से विकास कार्यों की रफ्तार कई गुना बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर आवास, आधारभूत सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिलेंगे। वहीं, विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कदम बिहार शहरी आयोजना तथा विकास नियमावली, 2014 के तहत उठाया गया है। इससे योजना निर्माण, निगरानी और समीक्षा जिला स्तर पर सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे जिलावार शहरी विकास को रफ्तार मिलेगी और राज्य के नागरिकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।