*सात दिनों तक दरिंदगी का शिकार हुई थी चौदह वर्षीय मासूम, आठ साल बाद कोर्ट ने दोषियों को दी कड़ी सजा*
*बेटी की चीखों को मिला न्याय, सलाखों के पीछे पहुंचे दरिंदे*
शिवहर जिले के अनन्य विशेष न्यायाधीश पॉस्को कोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2016 का है, जिसमें पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के बाद अब जाकर न्याय मिला है। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया और उन्हें कारावास की सजा के साथ-साथ आर्थिक दंड से भी दंडित किया है।
पॉस्को कोर्ट के न्यायाधीश दीपांजन मिश्रा की अदालत ने शिवहर थाना कांड संख्या 168/16 की सुनवाई करते हुए मुख्य अभियुक्त शंभू साह और अमरेश साह को इस घृणित अपराध का जिम्मेदार पाया। ये दोनों अभियुक्त ग्राम सुगीया कटसरी, थाना जिला शिवहर के निवासी हैं। न्यायालय ने इन दोनों को भारतीय दंड विधान की धारा 363 के तहत अपहरण के मामले में 7 वर्ष और पॉस्को अधिनियम की धारा 376-4 के तहत बलात्कार के मामले में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
सजा के साथ ही न्यायालय ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि दोषी इस राशि का भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त तीन माह की जेल की सजा काटनी होगी। इसके अलावा न्यायालय ने पीड़िता के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उसे तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का भी महत्वपूर्ण आदेश निर्गत किया है, ताकि उसे भविष्य में संबल मिल सके।
इस मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो पॉस्को कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक राजेश्वर कुमार ने बताया कि घटना 22 सितंबर 2016 की है।
पीड़िता के पिता विभीषण तिवारी ने 23 सितंबर 2016 को शिवहर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनकी 14 वर्षीय बेटी संध्या के समय जब शौच के लिए बाहर गई थी, तभी आरोपियों ने एक मार्शल गाड़ी का उपयोग कर उसका मुंह दबाकर अपहरण कर लिया था। अपहरण के बाद उसे मुजफ्फरपुर ले जाया गया, जहां उसे सात दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान अभियुक्तों ने उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए और उसे प्रताड़ित किया।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए छापेमारी की और सात दिनों के भीतर पीड़िता को मुजफ्फरपुर से बरामद कर लिया था। बरामदगी के बाद पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और मेडिकल जांच कराई गई, जिसने मामले की पुष्टि की। पुलिस ने साक्ष्यों को संकलित कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों की गवाही ने यह सिद्ध कर दिया कि अभियुक्तों ने एक नाबालिग के जीवन और गरिमा के साथ खिलवाड़ किया था। न्यायालय के इस फैसले को समाज में एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है ताकि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।